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चीन से फर्नीचर आयात पर 25 फीसदी सीमा शुल्क

March 5th 2020

सरकार ने फर्नीचर मान्यफैक्चरिंग में मेक इन इंडिया’ के पहल को बढ़ावा देने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं और चीन से फर्नीचर के आयात पर 25 फीसदी की बीसीडी (बेसिक सीमा शुल्क) लगाकर रोक लगा दी है। ईपीसीएच ने चीन से हेंडीक्राफ्ट और फर्नीचर के आयात पर ऊंची सीमा शुल्क लगाने का अनुरोध किया था। उद्योग के लोगों ने सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम की सराहना की है, और वे घरेलू खपत को लेकर काफी उत्साहित भी हैं। कई प्लेयर्स ने बताया कि अब वे प्राइस पॉइंट पर चाइनिज आयात के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।

घरेलू फर्नीचर निर्माताओं का कहना है कि भारत चीन, ताइवान, मलेशिया, इंडोनेशिया और इटली तथा स्पेन जैस कई अन्य यूरोपीय देशों से फर्नीचर आयात करता है, हालाँकि, प्रमुख आयात चीन से ही होता है। भारत के फर्नीचर अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद होने के बावजूद, चाइनिज आयातित उत्पाद सस्ते होनें के कारण स्थानीय स्तर पर बने फर्नीचर की मांग पिट जाती है। अब आयात शुल्क (25 फीसदी) लगाने के बाद, घरेलू फर्नीचर की मांग बढ़ेगी और दुनिया भर में चीन विरोधी भावना के चलते निर्यात के मोर्चे पर भी घरेलू निर्माताओं को मदद मिलेगी।

जेईएचए, राजस्थान के अध्यक्ष श्री भारत दिनेश ने कहा, “अगर हमें उद्योग और स्वदेशी विनिर्माण, बिक्री और बाजार को बढ़ावा देना है, तो कोरोना के बाद के समय में चीन से फर्नीचर के आयात पर प्रतिबंध लगाना सरकार द्वारा उठाया गया स्वागत योग्य कदम है। यह रोजगार पैदा करेगा और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर हमारे देश को अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी मुद्रा की बचत कर लाभान्वित करेगा। हालाँकि, यह एक अस्थायी राहत है, पर लंबे समय तक दुनिया भर से प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए, हमें अपनी उत्पादकता, माल की गुणवत्ता और फिनिश को बढ़ाने के लिए अपने सिस्टम, प्रौद्योगिकी और मान्यफैक्चरिंग प्रोसेस को अपग्रेड करना होगा।”

‘‘यह भारतीय फर्नीचर मैन्युफैक्चरिंग के लिए मशीन मैन्युफैक्चरिंग को भी नई दिशा दिखाएगा और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप अपने ऑफरिंग को और उन्नत करने के लिए मजबूर करेगा,‘‘श्री दिनेश ने कहा। ‘‘फर्नीचर निर्माण में स्वदेशी तकनीक बहुत प्रभावी नहीं है, इसलिए विदेशी बाजारों से डिमांड और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप उत्पादन के लिए, भारत को उन्नत प्रौद्योगिकी का आयात करना होगा।“

‘‘ऑफिस फर्नीचर में कुल आयात का लगभग 60 फीसदी चीन से आयत होता है। हार्डवुड फर्नीचर आयात में बड़ा हिस्सा नहीं है, लेकिन अगर चीनी फर्नीचर महंगा हो जाता है, तो लोग हार्डवुड फर्नीचर को अपनाएंगे तथा क्वालिटी और बेहतर फिनिश के लिए कहेंगे। मेरे अनुमान में, अगले साल डोमेस्टिक सेल्स में लगभग 125 फीसदी की वृद्धि होगी और यह लोकल मैन्युफैक्चरिंग को भी काफी बढ़ावा देगा,”श्री भरत दिनेश ने आगे कहा।

सूत्रों के अनुसार उद्योग को अंडर-इनवॉयसिंग की भारी समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है, जहां देश में भेजे जाने वाले सामानों के मूल्य को वास्तविक आयात मूल्य से कम दिखाया जाता है ताकि सीमा शुल्क की बचत की जा सके। उद्योग के प्लेयर्स का कहना है कि ऑफिस फर्नीचर काफी हद तक मेड इन चाइना ही था जिसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। वाणिज्य विभाग के आकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 में फ3 का आयात लगभग 8,300 करोड़ रुपये होने का अनुमान था, जिनमें से चीनी शिपमेंट लगभग 4,812 करोड़ रुपये था। 2018-19 में, फर्नीचर आयात (वेडिंग और मैट्रेस्स सहित) का अनुमान लगभग 12,500 करोड़ रुपये था।

तिरुपति एक्सोक्रॉफ्ट्स के निदेशक श्री मोहित मेह्नोट ने कहा, “यह जयपुर, जोधपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और देश भर के अन्य रेडीमेड फर्नीचर निर्माताओं के लिए बहुत अच्छा संकेत है। चीनी की तुलना में बेहतर गुणवत्ता देने के बावजूद, हम प्राइस पॉइंट पर उनका मुकाबला करने में सक्षम नहीं थे, अब हम उनसे मुकाबला कर सकते हैं। यह भारतीय फर्नीचर मैन्युफैक्चरिंग को सभी प्रकार से लाभान्वित करेगा क्योंकि अब ये होटल, रेस्तरां, अस्पताल, स्कूल और अन्य किसी भी परियोजनाओं के लिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदान करने में सक्षम होंगे। स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स के साथ जुड़ने से आफ्टर सेल्स सर्विस में भी ग्राहकों को फायदा होगा।”

“लोग अधिक खर्च भी करने के लिए तैयार होंगे क्योंकि वेसॉलिडवुड के फर्नीचर खरीद रहे होंगे। जिस तरह का फर्नीचर चीन से भारत आ रहा था, वह अब सस्ते में उपलब्ध नहीं होगा। मुझे लगता है अगले साल तक ग्रोथ दोगुना हो जाएगा। कोविड को लेकर अभी छह महीने तक बाजार में लिक्विडिटी, कैप्टल, लेवर और डिमांड के मामले में उद्योग के सामने कई चुनौतियाँ होंगे, ”उन्होंने कहा।

जोधपुर स्थित क्रॉस कंट्री के निदेशक, श्री मनीष झंवर ने कहा, “जोधपुर के हेंडीक्राफ्ट फर्नीचर के लगभग 3500 कंटेनरों का निर्यात किया जा रहा है और स्थानीय खपत लगभग 2,000 करोड़ रुपये का है, मेरे अनुमान के मुताबिक अगले वर्ष तक यह आकड़ा दोगुनी हो जाएगी। दुनिया भर में सेंटीमेंट चीन के खिलाफ है और इसका फायदा भी हमें मिलेगा। केवल 10 दिनों में ही हमें विभिन्न देशों से कई इन्क्वायरी आई हैं जो अन्यथा चीन के खरीदार थे। बाजार खुलने के बाद हमने एक प्रोजेक्ट को फाइनल भी किया है और तीन पाइपलाइन में हैं। लेकिन, मैं यह कहना चाहूंगा कि इन प्रोजेक्ट की गुणवत्ता के स्तर को हासिल करने के लिए हमें मशीनरी और प्रौद्योगिकी को अपग्रेड करना होगा। इसके बिना उद्योग प्रतिस्पर्धा से मुकाबला करने में सक्षम नहीं होगा। इसलिए, वर्तमान में सरकार को फैक्ट्री संचालन में सब्सिडी और अन्य कई लाभ देकर समर्थन करना चाहिए।‘‘

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