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वुड पैनल सेक्टर में डिमांड और सप्लाई के हालात!

March 5th 2020

प्लाई रिपोर्टर ने मटेसिया एग्जिविशन और आईआईआर कांफ्रेंस के दौरान हजारों लोगों से बातचीत की और कुछ निष्कर्ष निकला है। नीचे दिए गए बातचीत के सारांश ट्रेड के लोगों के लिए सहायक हो सकते है। टिम्बर और रेजिन का बढा हुआ इनपुट कॉस्ट प्लाइवुड के सेल्स प्राइस में नहीं मिल पा रहा है, इसलिए अधिकांश इंडस्ट्री क्लस्टर में उत्पादन 40-50 फीसदी तक कम हो गया है। स्मॉल स्केल प्लाइवुड इंडस्ट्री नाजुक स्थिति में हैं, जहां ब्रांडेड और ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स बहुत कम मार्जिन पर काम कर रहे हैं, जबकिटिम्बर कॉस्ट बहुत ज्यादा है।

भारतीय प्लाइवुड उद्योग पर सेल्स वॉल्यूम और प्राइस मिसमैच को लेकर काफी दबाव है। वित्त वर्ष 22-23 के दौरान प्लाइवुड इंडस्ट्री का ग्रोथ कॉस्टेंट रहने की उम्मीद है। जब तक टिम्बर प्राइस नहीं घटता और सेल्स प्राइस नहीं बढ़ता, तब तक इस वर्ष प्लाइवुड सेक्टर नगण्य मार्जिन की ओर ही बढ़ता रहेगा। प्लाइवुड की तुलना में पार्टिकल बोर्ड सेक्टर में काफी अच्छी डिमांड है क्योंकि इसकी मांग और आपूर्ति संतुलन में है। बढ़ते घरेलू मांग और फर्नीचर क्षेत्र में बढ़ती खपत के कारण पार्टिकल बोर्ड सेक्टर डबल डिजिट के साथ स्थिरता से ग्रोथ हो रहा है। महानगरों के होलसेलर्स भी अब पार्टिकल बोर्ड व्यापार में उतर रहे हैं जो प्रोडक्ट के विस्तार का संकेत है।

डेकोरेटिव लेमिनेट सेक्टर में, क्वालिटी और ब्रांड पर फोकस करने वाले बड़े उद्योग अब अनऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स को बाहर करने लगे हैं, हालांकि कच्चे माल की कीमतों में कमी के साथ लेमिनेट की सप्लाई में सुधार हुआ है। लेमिनेट सेक्टर के लिए परिदृश्य अच्छा दिख रहा है क्योंकि इंटीरियर के काम में फिर से तेजी आई है। लेमिनेट एक्सपोर्ट 2.7 बिलियन डॉलर के साथ 17 फीसदी की वृद्धि और ऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स में स्थानीय की मांग बढ़ने के साथ, भारतीय लेमिनेट सेक्टर अब बहुत अच्छा कर रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि भारतीय लेमिनेट इंडस्ट्री इस वर्ष फिर से दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज करेगी।

एमडीएफ में घरेलू मांग हर महीने बढ़ रही है साथ ही सप्लाई भी बढ़ रही है। घरेलू फैक्ट्रियों से लगभग 20 फीसदी उत्पादन बढ़ा है जबकि आयात में भी पूरी तेजी देखी जा रही है। अगर हम आंकड़ों को देखें, तो पिछले साल एमडीएफ का आयात भारतीय बाजार के 3 फीसदी के बराबर था, हम कह सकते हैं कि यह लगभग नगण्य था, लेकिन अचानक जून-जुलाई 2022 तक यह वॉल्यूम 8-9 फीसदी को छूने लगा है। यदि घरेलू स्तर पर टिम्बर की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो आने समय में एमडीएफ का आयात 2019 के स्तर या उससे ज्यादा भी हो सकता है।

दक्षिण एशिया से भारत के रुट के लिए माल ढुलाई भाड़ा में हालिया गिरावट से मुख्य रूप से थाईलैंड और मलेशिया से एक बार फिर से आयात तेजी से बढ़ रहा है। वैश्विक मंदी के डर के साथ, भारत में सस्ते आयात बढ़ सकते हैं क्योंकि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होगा। अगर वैश्विक मंदी की आशंका सच होती है, तो 2023 में ये सस्ते आयात भारतीय वुड पैनल इंडस्ट्री के लिए परेशानी खड़ा करेगा। अभी भारतीय रियल एस्टेट में रिकॉर्ड बिक्री के कारण रियल एस्टेट की कीमतों में वृद्धि को बल मिला है जिससे इसके काम में भी उत्साही गतिविधि देखी जा रही है।

भारत में महानगरों में अपार्टमेंट के साथ-साथ कमर्शियल, डेटा सेंटर और वेयरहाउसिंग स्पेस की मांग काफी तेजी से बढ़ने के कारण वर्ष 2022 कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए अच्छा साबित हो रहा है। नई परियोजनाओं के आने के बावजूद, रेसिडेंसियल के साथ-साथ कमर्शियल रियल एस्टेट में इन्वेंटरी में गिरावट इंटीरियर और फर्नीचर सेक्टर के ग्रोथ के लिए बहुत अच्छी संभावनाओं का संकेत है। प्रगति मैदान में हमारे मटेसिया 2022 एग्जीविषन के पहले एडिशन में सहयोग देने के लिए मैं सभी को धन्यवाद देता हूं। अगले वर्ष मटेसिया 2023 अगस्त 18-20 को आयोजित किया जाएगा और हमें उम्मीद है कि उसमे फिर से एक नॉलेज सेंट्रिक के साथ बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी।

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प्रगत द्विवेदी

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