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उत्तर प्रदेश सरकार और यूएसएआईडी ने उत्तर प्रदेश में प्लांटेशन बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू की

March 5th 2020

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग और यू.एस. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) ने 31 जनवरी, 2023 को उत्तर प्रदेश में ‘ट्रीज आउटसाइड फॉरेस्ट्स इन इंडिया (टीओएफआई)‘ कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की, जो कि राज्य में पारंपरिक वनों के अलावा तेजी से वृक्षारोपण का विस्तार करने के लिए किसानों, कंपनियों और अन्य निजी संस्थानों को एक साथ लाने का प्रयाश करेगी। नई पहल कार्बन सेक्युएसट्रेशन को बढ़ाएगी, स्थानीय समुदायों का समर्थन करेगी, और कृषि के लिए जलवायु के लचीलेपन को मजबूत करेगी, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन और अनुकूलन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोग होगा।

उत्तर प्रदेश ने लंबे समय से टीओएफ के आवरण में सुधार को उच्च प्राथमिकता दे रही है, जैसा कि एग्रो फॉरेस्टरी के एकीकरण, या अग्रिकल्चर में पेड़ों के एकीकरण, जलवायु परिवर्तन पर अपनी राज्य कार्य योजना में, और किसानों को कार्बन से जोड़ने के अपने काम के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। टीओएफआई उत्तर प्रदेश में किसानों की आय में और वृद्धि करते हुए, कृषि में लचीलेपन को बढ़ाने के लिए राज्य की प्रगति और एग्रो फॉरेस्टरी का उपयोग करेगा जिससे रोजगार सृजित करने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

लॉन्च की घोषणा करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री अरुण कुमार सक्सेना ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार कृषि वानिकी और वृक्षारोपण के लिए बाहर की भूमि पर एक प्रमुखता से जोर दे रही है। अध् िासूचित वन क्षेत्र कुल हरित आवरण के केवल 9 प्रतिशत के साथ, राज्य में अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की व्यापक क्षमता है।कार्यक्रम निश्चित रूप से वृक्षों के आवरण को बढ़ावा देने में मदद करेगा, किसानों को उनकी आय, आजीविका सुरक्षा और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ाते हुए सही जगह पर सही ट्री स्पेसीज को चुनने में सहायता करेगा।

उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री मनोज सिंह ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश कृषि वानिकी को लागू करने में अग्रणी रहा है। राज्य ने अगले पांच वर्षों में 175 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है और वुड बेस्ड इंडस्ट्री से जुड़ी कृषि वानिकी नीतियों को विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। राज्य सरकार ट्रांजिट नियमों में ढील और सरलीकरण पर भी काम कर रही है। प्रत्येक कमिश्नरी में एक हाई-टेक नर्सरी और प्रत्येक न्याय पंचायत में ग्राम स्तर की नर्सरी स्थापित करने के लिए आगे की पहल की जाएगी। कृषि वानिकी प्रथाएं न केवल जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए फायदेमंद होंगी, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने में भी मददगार होंगी।”

यह कार्यक्रम असम, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों में $25 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक आवंटित करेगा और इसे इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च इन एग्रोफोरेस्ट्री के साथ साझेदारी में लागू किया गया है। 2.8 मिलियन हेक्टेयर तक पारंपरिक वनों के बाहर वृक्षों के कवरेज का तेजी से विस्तार करने के लक्ष्य के साथ, कार्यक्रम 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त ष्कार्बन सिंकष् बनाने के भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगा। यह नया कार्यक्रम जलवायु संकट से निपटने और जलवायु खतरों और मौसम की घटनाओं का सामना करने के लिए अमेरिका-भारत की स्थायी साझेदारी पर आधारित है।

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