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टीक विनियर की मांग बढ़ी, सबसे ज्यादा बिकने वाली वुड विनियर स्पेसीज बनी

March 5th 2020

जब सरफेसिंग मेटेरियल की बात आती है तो हजारों डिजाइन विकल्प होने के बावजूद टीक डेकोरेटिव विनियर भारत के बाजार में अपना आकर्षण और पकड़ बनाए हुए हैं। यह अभी भी 140 से अधिक अन्य नेचुरल वुड स्पेसीज जो विभिन्न देशों से भारत में लाया जाता है, के बीच विनियर सेगमेंट में सबसे ज्यादा मात्रा में खपत होती है। वर्ष 2017-18 के लिए प्लाई रिपोर्टर द्वारा किये गए सर्वे भारत के विभिन्न बाजार में टीक विनियर की मांग में तेज वृद्धि दर्शाता है। टीक की मांग बढ़ने का कारण इसकी आसान उपलब्धता, ट्रेंड के साथ मिक्स मैच होना और फ्यूम्ड क्रिएशन है जो महानगरों में टीक विनियर की मांग को बल दिया है।

प्लाई रिपोर्टर के मुताबिक देश में डेकोरेटिव विनियर की मांग में अकेले टीक विनियर का 45 फीसदी योगदान है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में मांग का पैटर्न एक जैसा नहीं है। सबसे ज्यादा खपत फर्नीचर बनाने वाले वैसे कारीगरों और कारपेंटरों के बीच है जो छोटे और उभरते शहरों में फर्नीचर बनाते हैं। जैसा की टीक बहुत कॉमन है, यह लोगों के बीच सबसे अच्छा माना जाता है और उसके नाम के साथ भारत में सकारात्मकता का भाव है इसलिए भी यह किफायती और हर खुदरा काउंटर पर आसानी से उपलब्ध है। इसके लिए बर्मा के स्लाइस विनियर सप्लायर का खास योगदान है।

दिल्ली-एनसीआर, लुधियाना, लखनऊ, मुरादाबाद, इंदौर, नागपुर, चेन्नई आदि जैसे शहरों के थोक बाजार में टीक विनियर की हाई डिमांड एक पुरानी बात है, लेकिन 2011 से 2013 के बीच मंदी के बाद मांग में वृद्धि हुई है। प्लाई रिपोर्टर‘ के सर्वे में यह पता चला है कि फिर से गोल्डन ब्राउन के साथ स्मोकी ब्राउन रंग के फैशन लौटने से टीक विनियर, भारत में सभी विनियर का किंग बनकर उभरा है। नेचुरल विनियर के बाजार के विस्तार के साथ पिछले दो वर्षों के दौरान टीक विनियर वॉल्यूम में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारतीय टीक प्लाई बाजार में आयातित टीक शीट की महत्वपूर्ण उपस्थिति है जो भारत के विभिन्न आयातकों द्वारा लाया जाता है।

दिल्ली-एनसीआर स्थित डेकोरेटिव प्लाइवुड निर्माता, टीक के किफायती से एक्सक्लूसिव की विस्तृत श्रृंखला की पेषकष के लिए जाने जाते हैं। वे कहते है कि टीक विनियर के बाजार बढ़ने के कारण इसका क्राउन कट और स्मोकी रेंज का होना है। यह नेचुरल विनियर को कठिन प्रतिस्पर्धा भी देता है जो 2000 से 3000 रूपए प्रति षीट की रेंज में बेचे जाते हैं। कई रिटेलर ने कहा कि पॉलिष करने में कठिनाई आने के बावजूद टीक सबसे अधिक पसंद किए जाते है क्योंकि यह सदाबहार है और सिंपल लैकर में भी अच्छा दिखता है।

क्राउन कट टीक विनियर का ट्रेंड एक आईएन ट्रेंड है, जिसने गुजरात, एमपी, महाराश्ट्र, आंध्र प्रदेश इत्यादि के बाजार में पकड़ बना रखी है। दोश मुक्त टीक विनियर की कीमत काफी ज्यादा है इसके बाद क्वार्टर या क्राउन कट्स की बारी आती हैं। कुछ डिफेक्ट्स जैसे नॉट्स, फ्लैषेस, फायर कट आदि के चलते यह खरीदारों को कम कीमत में भी मिल जाती है, लेकिन डेकोरेटिव प्लाइवुड निर्माताओं द्वारा कलात्मक सृजन के बाद, इन दोशों को एक्सक्लूसिव और बड़े मार्जिन में बदल दिया जाता है।

सदाबहार स्टेट ग्रेन पैटर्न, टीक विनियर प्लाइवुड की मांग उत्तर और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में तेजी से बढ़ी है। इसके लिए देश में नए मैन्यूफक्चरर्स और स्लाइसर का योगदान है। नागपुर स्थित आपूर्तिकर्ताओं ने भी खुद को एक स्लाइसिंग कंपनी से टीक में विशेषज्ञता हासिल कर डेकोरेटिव प्लाइवुड मैन्यूफैक्चरिंग में परिवर्तित किया है। नागपुर भारत में टीक प्लांटेशन में प्रमुख होने के अलावा टीक का मुख्य आपूर्ति केंद्र रहा है।

मिक्स-मैच प्रैक्टिसेज में, सैपवुड और हार्टवुड हिस्से को सुन्दर बनाने, रंग चढाने या कभी कभी फ्यूम्ड करने के लिए मिला दिया जाता है। पिछले 3-4 सालों से यह ट्रेंड काफी प्रचलित है और इससे यहां तक की समृद्ध खरीददारों के बीच भी बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है। हालांकि मिक्स मैच के बाद, रंग और रचनात्मक मिलान पिछले 3-4 वर्षों के दौरान फैशन में शीर्ष पर रहा। खामियों के साथ टीक विनियर रचनात्मक और अद्वितीय स्टाइल में विकसित हुआ, विशेष रूप से भारत के मेट्रो में खरीदारों के बीच काफी आकर्षण प्राप्त किया। वॉल पैनलिंग, एकॉस्टिक, डोर, अलमारियाँ, फर्नीचर, रूफिंग को अब फिर से टीक के साथ बनाया जा रहा है, जो पहले विदेशी एक्जोटिक नेचुरल से बनाए जाते थे।

निस्संदेह ‘टीक डेकोरेटिव विनियर‘ भारत में अन्य वुड प्रजातियों के बीच उच्चतम मात्रा में वृद्धि करने वाला है और समय के साथ लगातार बढ़ रहा है, यह अनुमान लगभग सभी प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं को है जो भारत के बाजार में सक्रिय हैं। प्लाई रिपोर्टर सर्वे में पाया गया कि ‘‘टीक बनाम नेचुरल बनाम रिकॉन्स्टिट्यूटेड विनियर‘‘ के कुल बाजार में लगभग 40ः45ः15 का अनुपात है जिसमें ‘टीक निर्विवाद रूप से सबसे आगे‘ है।

दिल्ली में एक टीक आयातक का कहना है कि पिछले दशक के दौरान म्यांमार के साथ-साथ चीन स्थित स्लाइसिंग इकाइयों द्वारा भारतीय बाजार को काफी हद तक फीड किया जाता था, लेकिन म्यांमार में लकड़ी के निर्यात पर प्रतिबंध ने भारत की बाजार गतिशीलता को धक्का पहुंचाया था।

म्यांमार स्थित टीक विनियर निर्माता ने कहा कि ‘मिक्स मैच और अन्य अपशिष्ट सामग्री की आपूर्ति से भारत में टीक विनियर की सप्लाई बढ़ी है‘ यही कारण है कि चीन स्थित टीक कंपनियां मेटेरियल और आपूर्ति में विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आपूर्ति करने में सक्षम हैं।

टीक लोकप्रिय है और आमतौर पर दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में पाया जाता है, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा बर्मा या म्यांमार से आपूर्ति किया जाता है। भारत में, यह सेंट्रल और दक्षिणी राज्यों में अच्छी तरह से बढ़ता है। बर्मा टीक, नागपुर टीक, दांदेली टीक, आदिलाबाद टीक, मालाबार टीक इत्यादि जैसे विभिन्न किस्में क्षेत्र के आधार पर नामांकित है ।

टेक्टोना ग्रैंडिस या टीक हार्डवुड परिवार का एक उष्णकटिबंधीय टिम्बर प्रजाति है जो म्यांमार, थाईलैंड, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में और घाना, कांगो आदि जैसे अफ्रीकी देशों में पाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2010 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, एफएओ नेचुरल टीक फारेस्ट कवर लगभग 29.035 मिलियन हेक्टेयर हैं जिनमें म्यांमार में कुल का लगभग आधा हिस्सा है।

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Ply Reporter
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